भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) अब 13 करोड़+ इंटरनेट उपयोगकर्ता को सेवा देती है और महीने में 10 अरब+ लेन-देन संसाधित करती है—लेकिन यही बुनियादी ढांचा साइबर खतरों को भी आमंत्रित करता है।
साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ: क्वांटम-कहानी शुरू
भारत में 2019-23 के बीच सरकारी साइबर हमलों में लगभग 138 % की वृद्धि हुई है। क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक एन्क्रिप्शन को समय के भीतर तोड़ सकती है—इसलिए तैयारी जरूरी है।
क्वांटम कंप्यूटिंग: अवसर और खतरा दोनों
भारत ने “Transitioning to Quantum Cyber Readiness” नामक वाइटपेपर जारी किया है जिसमें कहा गया है कि RSA, ECC जैसे एल्गोरिदम अब खतरे में हैं और क्वांटम-रोबस्ट क्रिप्टोग्राफी की ओर बढ़ना रहेगा।
तैयारियाँ: नियम-नीति और संस्थाएं आगे
भारत में संशोधित Allocation of Business Rules ने साइबर सुरक्षा जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया है। खुलासा हुआ कि अब CERT‑In, NSCS, DoT आदि को नई भूमिका मिली है।
आगे की राह: निरंतर तैयारी
क्वांटम-तैयारी, क्लाउड सुरक्षा, साइबर स्किल्स और पीक साइबर नेटवर्क्स के आगमन के साथ भारत को डिजिटल भविष्य के लिए तैयार होना होगा—यह सिर्फ तकनीक नहीं, रणनीति है।