भारत में पहली बार Wildlife Institute of India (WII) ने “SAIEE 2021-25” के तहत डीएनए मार्क-रिकैप्चर पद्धति से पूरे देश में हाथियों की गणना की।
संख्या में ~25% की कमी
2017 में लगभग 29,964 जंगली हाथी थे, जो अब 22,446 तक घटकर आ गए हैं — यानी लगभग 25% की गिरावट।
गिरावट के कारण सामने आए
हाथियों के घने इलाके कट-फ्रैगमेंट हो गए हैं, रेल-लाइनों और विद्युत केबलों से हादसे बढ़े हैं, तथा इंसान-हाथी संघर्ष में वृद्धि हुई है।
पुरानी गिनती से नई तकनीक
पहले हाथियों की गिनती आँख-देखी या मल-उद्घाटन से होती थी — अब डीएनए सैम्पलिंग से “चिह्नित-पकड़” (mark-recapture) पद्धति से अधिक विश्वसनीय संख्या मिली है।
बचाव के लिए दिशा तय करना ज़रूरी
हाथी कॉरिडोरों की बहाली, रेल-लाइन जोखिम क्षेत्रों में रोक-थाम, स्थानीय समुदायों का समावेश — इन कदमों से गिरावट को रोका जा सकता है।