विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि भारत की वृद्धि एक “असाधारण यात्रा” है, जिसे हमें बहुपक्षीयता, रणनीतिक स्वायत्तता और विचारों की नवीनीकरण की आवश्यकता है।
विकास गति और व्यापार दबाव
IMF ने भारत को वैश्विक विकास इंजन कहा है, जबकि गिरती विदेशी मांग और व्यापार टैरिफ चुनौतियाँ बढ़ा रहे हैं।
बंदर-बंधुत्व नहीं, बहुपक्षीयता की राह
भारत ‘मल्टि-अलाइनमेंट’ को अपना रहा है — अमेरिका, रूस, चीन के बीच संतुलन बनाने की नीति अपनाई जा रही है। नवाचार और विदेश नीति में स्वायत्तता प्रमुख है।
बाधाएँ जो रास्ते में हैं
टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की कमी, सुरक्षा भावनाएँ, सीमा तनाव और आर्थिक असमानताएँ—ये सब भारत के समीकरण को जटिल बनाते हैं।
आगे का रास्ता: सोच बदलें, रूपरेखा तैयार करें
भारत को अपने ‘2047 विकास लक्ष्य’ के लिए नीति, निर्माण, तकनीक और शिक्षा में निवेश बढ़ाना होगा। वैश्विक परिषदों में भूमिका, जलवायु नीति, निर्यात-विस विस्तार अवसर हैं।